वट सावित्री व्रत 2026: सही तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा, नियम और सभी राज्यों की परंपराएं

वट सावित्री व्रत 2026 का महत्व

वट सावित्री व्रत 2026 हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस पर्व को बरगद पूजा, वट अमावस्या, वर पूजा और कई राज्यों में Vat Purnima 2026 के नाम से भी जाना जाता है।

भारतीय सनातन परंपरा में यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। सावित्री सत्यवान कथा इस व्रत का मुख्य आधार है, जिसमें माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और पतिव्रता धर्म से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।

आज भी उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कई राज्यों में यह व्रत अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

वट सावित्री व्रत 2026 कब है?

पर्वतारीखदिन
वट सावित्री अमावस्या व्रत16 मई 2026शनिवार
वट पूर्णिमा व्रत29 जून 2026सोमवार

उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या 2026 के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाएगा, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में Vat Purnima 2026 के रूप में यह पर्व पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है।

वट सावित्री व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
अमावस्या तिथि प्रारंभ16 मई 2026 सुबह 05:11 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त17 मई 2026 रात 01:30 बजे
ब्रह्म मुहूर्त03:39 AM से 04:21 AM
अभिजीत मुहूर्त11:19 AM से 12:13 PM
विजय मुहूर्त02:00 PM से 02:54 PM
गोधूलि मुहूर्त06:27 PM से 06:48 PM

उदय तिथि के अनुसार वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 शनिवार को रखा जाएगा।

वट सावित्री पूजा क्यों मनाया जाता है?

यह व्रत माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि सत्यवान की अल्पायु निश्चित थी। जब यमराज उनके प्राण लेने आए तो सावित्री ने अपने ज्ञान, तप और अटल पतिव्रता धर्म से यमराज को प्रसन्न कर लिया।

यमराज ने अंततः सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया। तभी से विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।

इस दिन बरगद पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि वट वृक्ष को त्रिदेवों का स्वरूप माना जाता है—

  • जड़ में ब्रह्मा जी
  • तने में विष्णु जी
  • शाखाओं में भगवान शिव का वास

इसी कारण वट वृक्ष की पूजा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

वट सावित्री व्रत का दूसरा नाम क्या है?

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस व्रत को विभिन्न नामों से जाना जाता है—

  • वट सावित्री व्रत
  • वट अमावस्या
  • वट पूर्णिमा
  • बर पूजा
  • बरगद पूजा
  • वर पूजा
  • अखंड सौभाग्य व्रत

बिहार में वट सावित्री व्रत 2026

बिहार में इस व्रत को “बर पूजा” या “वर पूजा” के नाम से भी जाना जाता है। यहां महिलाएं सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र पहनकर समूह में बरगद के पेड़ के पास जाती हैं।

बिहार की विशेष परंपराएं

  • बरगद पर कच्चा सूत लपेटना
  • 7 या 108 परिक्रमा करना
  • गुलगुले और ठेकुआ बनाना
  • भीगे चने और फल का भोग लगाना
  • सावित्री सत्यवान कथा सुनना

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं लोकगीत भी गाती हैं।

झारखंड में वट सावित्री पूजा

झारखंड में विवाहित महिलाएं इस व्रत को अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाती हैं। यहां आदिवासी और पारंपरिक हिंदू संस्कृति का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।

झारखंड की खास बातें

  • महिलाएं लाल साड़ी पहनती हैं
  • सामूहिक पूजा की परंपरा
  • बरगद की जड़ में जल अर्पित करना
  • सुहाग सामग्री चढ़ाना

Uttar Pradesh में वट सावित्री व्रत

उत्तर प्रदेश में यह पर्व बहुत लोकप्रिय है। विशेषकर वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और लखनऊ में महिलाएं बड़े उत्साह से यह व्रत करती हैं।

उत्तर प्रदेश की परंपरा

  • निर्जला व्रत रखना
  • वट वृक्ष की 7 परिक्रमा
  • पति की लंबी आयु की कामना
  • ब्राह्मण को दान देना

Madhya Pradesh और Chhattisgarh में व्रत

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस व्रत को पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

यहां की विशेषताएं

  • मिट्टी से सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा बनाना
  • कथा सुनने के बाद पूजा समाप्त करना
  • गेहूं और चने का दान

Vat Savitri Vrat 2026 in Maharashtra

महाराष्ट्र में यह व्रत Vat Purnima 2026 के रूप में मनाया जाता है।

पर्वतारीख
वट पूर्णिमा व्रत29 जून 2026

महाराष्ट्र की परंपरा

  • महिलाएं नौवारी साड़ी पहनती हैं
  • बरगद के पेड़ की पूजा
  • पति के साथ पूजा करना
  • हल्दी-कुमकुम समारोह

यहां महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग सामग्री भेंट करती हैं।

Vat Savitri Vrat 2026 in Gujarat

गुजरात में भी यह पर्व पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है।

Bar Puja 2026 Gujarati Calendar

गुजरात में इसे “वट पूर्णिमा” कहा जाता है। महिलाएं उपवास रखकर बरगद वृक्ष की पूजा करती हैं।

गुजरात की प्रमुख परंपराएं

  • सफेद और लाल वस्त्र पहनना
  • सूत बांधना
  • मिठाई और फल चढ़ाना
  • कथा श्रवण

दक्षिण भारत में वट सावित्री व्रत

दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में यह व्रत सीमित रूप से मनाया जाता है, लेकिन इसका धार्मिक महत्व समान रहता है।

प्रमुख विशेषताएं

  • देवी सावित्री की पूजा
  • पति की लंबी आयु की कामना
  • शिव और विष्णु पूजा

वट सावित्री पूजा विधि

पूजा सामग्री

  • कच्चा सूत
  • रोली
  • अक्षत
  • दीपक
  • धूप
  • फल
  • भीगे चने
  • लाल कपड़ा
  • जल का लोटा
  • मिठाई
  • सुहाग सामग्री

वट सावित्री व्रत कैसे किया जाता है?

चरणबद्ध पूजा विधि

1. सुबह जल्दी उठें

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. श्रृंगार करें

सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु और माता सावित्री का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।

4. बरगद वृक्ष की पूजा करें

वट वृक्ष पर जल चढ़ाएं, रोली और अक्षत अर्पित करें।

5. सूत बांधें

बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें।

6. कथा सुनें

सावित्री सत्यवान कथा अवश्य सुनें।

7. आरती करें

दीपक जलाकर आरती करें।

8. दान करें

गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन एवं दान दें।

वट वृक्ष की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

यह प्रश्न बहुत पूछा जाता है कि वट वृक्ष की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

विभिन्न परंपराओं में अलग-अलग संख्या प्रचलित है—

क्षेत्रपरिक्रमा संख्या
उत्तर भारत7
बिहार7 या 11
कुछ परंपराएं21
विशेष धार्मिक मान्यता108

श्रद्धा और क्षमता के अनुसार परिक्रमा की जा सकती है।

वट सावित्री व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?

क्या खाएं?

  • फल
  • दूध
  • सूखे मेवे
  • साबूदाना
  • मखाना
  • सिंघाड़े का आटा

क्या नहीं खाएं?

  • मांसाहार
  • लहसुन-प्याज
  • शराब
  • तामसिक भोजन

कई महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं।

सावित्री सत्यवान कथा

पौराणिक कथा के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत तेजस्वी और गुणवान थीं। उन्होंने सत्यवान को पति के रूप में चुना, जबकि ऋषियों ने बताया था कि सत्यवान अल्पायु हैं।

विवाह के बाद सावित्री ने कठोर तप किया। नियत दिन जब सत्यवान जंगल में लकड़ी काट रहे थे, तभी उनकी मृत्यु हो गई।

यमराज उनके प्राण लेकर जाने लगे। सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं। उनकी भक्ति और बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान मांगने को कहा।

सावित्री ने पहले अपने सास-ससुर की आंखों की रोशनी मांगी, फिर राज्य की समृद्धि और अंत में सौ पुत्रों का वरदान मांग लिया।

यमराज ने वरदान दे दिया। तब सावित्री ने कहा कि बिना पति के पुत्र कैसे होंगे? यमराज उनकी बुद्धिमानी से प्रसन्न हुए और सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए।

क्या कुंवारी लड़की वट सावित्री व्रत कर सकती है?

हां, कुछ स्थानों पर अविवाहित लड़कियां भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। हालांकि मुख्य रूप से यह व्रत विवाहित महिलाओं का माना जाता है।

वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व

Akhand Saubhagya Vrat: यह व्रत “अखंड सौभाग्य” का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में सुहाग की रक्षा और पति की दीर्घायु के लिए यह अत्यंत प्रभावशाली व्रत माना गया है।

धार्मिक लाभ

  • पति की लंबी आयु
  • वैवाहिक जीवन में सुख
  • परिवार में समृद्धि
  • संतान सुख
  • मानसिक शांति

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 का महत्व

Jyeshtha Amavasya 2026

ज्येष्ठ अमावस्या हिंदू पंचांग में विशेष महत्व रखती है। इस दिन—

  • पितरों का तर्पण
  • शनि पूजा
  • दान-पुण्य
  • बरगद पूजा

विशेष फलदायी मानी जाती है।

2026 में ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई को पड़ेगी।

वट सावित्री व्रत में दान का महत्व

इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या दान करें?

  • वस्त्र
  • फल
  • अनाज
  • जल
  • छाता
  • चप्पल
  • दक्षिणा

वट सावित्री व्रत के नियम

  1. सुबह जल्दी उठें
  2. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  3. क्रोध और झूठ से बचें
  4. सात्विक भोजन करें
  5. कथा अवश्य सुनें
  6. बरगद वृक्ष की पूजा करें
  7. पति का सम्मान करें

वैज्ञानिक दृष्टि से वट वृक्ष का महत्व

बरगद का पेड़ केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वट वृक्ष के लाभ

  • अधिक ऑक्सीजन देता है
  • पर्यावरण को शुद्ध करता है
  • औषधीय गुणों से भरपूर
  • गर्मी कम करने में सहायक

इसी कारण भारतीय संस्कृति में वट वृक्ष को देवतुल्य माना गया है।

वट सावित्री व्रत और आधुनिक जीवन

आज के समय में भी यह व्रत भारतीय परिवार व्यवस्था और वैवाहिक संबंधों को मजबूत बनाने का प्रतीक है। महिलाएं इस दिन परिवार की खुशहाली और वैवाहिक स्थिरता के लिए प्रार्थना करती हैं।

Read in english Vat Savitri Vrat 2026.

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FAQs

वट सावित्री व्रत कब है 2026?

वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 शनिवार को रखा जाएगा।

वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त पूजा के लिए शुभ माने गए हैं।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि क्या है?

बरगद वृक्ष की पूजा, सूत बांधना, परिक्रमा करना और सावित्री सत्यवान कथा सुनना मुख्य विधि है।

वट सावित्री व्रत में कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

अधिकतर स्थानों पर 7 परिक्रमा की जाती है, जबकि कुछ परंपराओं में 108 परिक्रमा का विधान है।

वट सावित्री व्रत कहां मनाया जाता है?

यह व्रत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है।

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